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| − | [[عقلانیت ؛ رمز بقای گونه بشر]]
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| − | [[عقلانیت و حل معمای جبر انتخاب]]
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| − | [[پرسش از دلیل انتخاب؛ سرچشمه عقلانیت]]
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| − | [[عقلانیت به مثابه شالوده تفکر]]
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| − | [[استقلال عقل از زبان]]
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| − | [[آیا رفتار آدمیان منطقی است؟]]
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| − | [[تفکیک قوانین طبیعی از منطق زبانی]]
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| − | [[تمایز زبان از عقل]]
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| − | [[مسخ عقلانیت، بهای خرید اعتماد]]
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| − | [[حذف تدریجی اندیشیدن بدون زبان]]
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| − | [[از خودبیگانگیِ اندیشه تا خودبیگانگیِ من]]
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| − | ***
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| − | اما مگر راهی برای گریز از این سرنوشت وجود دارد؟
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| − | چنین میاندیشم که چنین راهی هست:
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| − | همهی ما، بخت این را داریم که گهگاه از دامِ چرخهی خودکامهی مکالمهی درونمان رها شویم و در سطحی
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| − | طبیعیتر، ژرفتر، و البته نامفهومتر، بیندیشیم. هنگامیکه موسیقیِ گوشنوازی را میشنویم یا هنگامیکه به خالقیت
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| − | هنری مشغولیم، در واقع، طغیانی بر ضد این عقالنیتِ ابزاریشده و ارتباطزده را تجربه میکنیم. تجربهی متوقف شدنِ
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| − | گفتار درونی برای بسیاری از ما آشناست و اگر کمی دقیق باشیم به هنگام فروکشکردن غوغای مکالمه با خود، جریانِ
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| − | بیوقفه ولی سرکوبشدهی تفکرِ طبیعی و ناب را در زیرِ سطحِ اندیشهی زبانی بازمییابیم.
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